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Friday, 19 August 2011

शिव महापुराण -6

शिव महापुराण -६




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कथा पूर्ण होने पर संत चरणों में गिरी ;
मुक्ति का उपाय उनसे पूछने वो  लगी ,
संत बोले ''शिव पुराण'' श्रवण ही उपाय है ;
पुण्य उदित होते हैं और पाप ये घटाए है .

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इसकी कथा के श्रवण से तुम पूर्ण मुक्ति पाओगी ;
राग-क्लेश मुक्त हो शांत-चित्त  हो जाओगी ,
साक्षात्-शिव ह्रदय में हैं अनुभव तुम्हे होगा यही ;
शिव मयी है ये जगत,शिव-शिव हैं हर कहीं .


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शिव पुराण स्वयं में शिव की दिव्य शक्ति है ;
गणेश-कार्तिकेय की मिलती इससे भक्ति है ,
चंचुला बोली प्रभु-इसकी कथा सुनाइए
मैं बड़ी हूँ पापिनी पाप से बचाइए .



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संत के निर्देश पर स्नान करके शुद्ध हुई ;
जटावल्कल   धारण कर कथा सुनी अमृतमयी ,
शिव की भक्ति में वो ऐसे लीन थी होती गयी
कथा श्रवण करते करते देह मुक्त वो भई .
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देह मुक्ति के अनन्तर शिव पुरी को वो गयी ,
गौरी शंकर के हुए दर्शन उसे महिमामयी ,
भक्त वत्सल शिव की लीला  होती सभी महान हैं ;
गौरी शंकर के ह्रदय में भक्त का स्थान है .


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माता गौरी ने उसे वरदान ये था दे दिया
'तुम रहो समीप मेरे 'मीठे वचनों में कहा ,
चंचुला को एक दिन पति-गति का पता चला ,
यातनाएं भोगता   पिशाच  yoni   में पडा  . 

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चंचुला ने माता से प्रार्थना फिर ये करी
मुक्ति दो मेरे पति को 'मात हे ममतामयी '
तुम्बरू  गन्धर्व को आदेश माता ने दिया
शिव पुराण की कथा विन्दुग को तुम दो सुना !



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तुम्बरू विन्ध्याचल पर सुनाने लगे अमृत कथा
विन्दुग के संग-संग श्रोता समूह भी आ जुटा,
कथा  श्रवण मात्र से विन्दुग का पाप कट गया ;
शिव ने उसे गणसमूह में गण का पद भी दे दिया .

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                 शिखा कौशिक

Monday, 18 July 2011

शिव-महापुराण [२]



''शिव-महापुराण  [२]''






* शिव पुराण तो स्वयं शिव का ही स्वरुप है ;
प्रत्येक शिव का भक्त शिव का ही दूजा रूप है ;
चित्त शुद्धि-प्रेम वृद्धि इसके श्रवण के लाभ हैं ;
शिव भक्त के चरण स्वयं तीर्थ राज प्रयाग हैं

 *इसके पठन पाठन  से मिलते दिव्य सब वरदान हैं  ;
इससे प्राप्त फल राजसूय यज्ञ के समान है ;
इसलिए हे सूत जी! हमको भी थोडा ज्ञान दो 
शिव भक्ति शीतल जल में करने हमें स्नान दो .

*सूत जी बोले मधुर वाणी में शौनक जी सुनो 
जो मुक्ति प्यास हो सदा शिव भक्ति रस ही पियो ;
शिव महा पुराण शिव-मुख से है प्रकट  हुई 
मुक्ति मार्ग खोलती अमृत-सदृश भक्तिमयी .

*सात संहिताएँ और चौबीस हज़ार शलोक हैं ;
प्रत्येक संहिता से मिलता नया आलोक है ;
शिव का भक्ति रस मन में सदा ही घोलती ;
हर संहिता शिव-तत्व के रहस्य खोलती .

*विद्येश्वर;रूद्र और शतरुद्र संहिता 
कोटि रूद्र,उमा और कैलाश नाम संहिता 
वायवीय जोड़कर सात हैं ये  संहिता सकल 
इनसे युक्त शिव महापुराण का है यश धवल .

*शिव महापुराण करती है मनोरथ सब सफल 
इसकी शीतल छाँव से त्रिताप का होता शमन 
ये बढाती बल पुरुष का ;संकटों की हो घडी 
आत्मा मुक्ति की सीढ़ी इसकी शक्ति से चढ़ी .

*फिर से शौनक जी ने की सूत जी से प्रार्थना 
आज आप कथा -पुष्पों से करे ये अर्चना ;
उन सभी पवित्र जन की जिनकी होती वंदना 
हे प्रभु !कहिये कथा खोलकर मन अर्गला .

*चित्त शुद्धि का यही सबसे सरल उपाय है ;
आदर्श पुरुषों की प्रेरक सभी कथाएं हैं ,
ये प्रभु के चरणों में आस्था बढ़ाएं हैं ;
इनसे हीन जन मूर्ख -निस्सहाय  है .

*सूत जी बोले -हे शौनक जी!  सत्य है तुमने कहा 
शिव पुराण पठन पाठन हरता हर संकट महा ;
मैं सुनाता हूँ तुम्हे -ये कथा प्राचीन है ;
किन्तु इसकी अर्थवत्ता आज भी नवीन है .
                                                               [जारी .....]

                                   शिखा कौशिक 



Sunday, 17 July 2011

'' शिव महापुराण ''



श्री गणेशाय नम: 
''हे गजानन! गणपति ! मुझको यही वरदान दो 
हो सफल मेरा ये कर्म दिव्य मुझको ज्ञान दो 
हे कपिल ! गौरीसुत ! सर्वप्रथम तेरी वंदना 
विघ्नहर्ता विघ्नहर साकार करना कल्पना ''
                     
''''सन्दर्भ  ''''
                                             ॐ नम : शिवाय !
                                            श्री सीतारामचन्द्रभ्याम नम :



                            
श्रवण मास के आरम्भ के साथ ही ह्रदय ''बम-बम भोले '' के उद्घोष से गूंज   उठता है .हमारी संस्कृति की अमूल्य धरोहर १८ पुराणों में ''शिव महापुराण '' का विशेष महत्व है .मैंने भगवान गौरीशंकर की प्रेरणा से इसकी कथा को काव्य रूप में प्रस्तुत करने का एक प्रयास किया है .इसे पठन करने से यदि आपके ह्रदय में शिव भक्ति का एक क्षण के लिए भी उद्भव होता है और आप आनंद की अनुभूति करते हैं तब मैं अपने इस कार्य को सफल मानूंगी  .भगवान गौरी शंकर मेरी सहायता करें !


                              ''शिव महापुराण महिमा ''
*सकल ब्रह्माण्ड में है शिव -तत्व की ही सत्ता  
जीवन में सर्वत्र है शिव-शब्द की महत्ता 
एक शक्ति तीन रूप -सृजन-पालन-अंत
 शिवत्व-प्राप्ति ही मानव का ध्येय अनंत 


*शिव ही हैं कल्याणकारी;शिव ही सुन्दरतम ;
शिव ही सत्य रूप हैं ;शिव हैं प्रभु परम;
इस तत्व को जो जानते निर्मल उन्ही का मन 
शिव भक्ति रस में डूबते वे पुण्यशाली जन .

 * शौनक जी हैं पूछते कर विनम्र नमस्कार 
सूत जी बतलाइए पुराणों का कुछ तो सार

जिन पुराणों के श्रवण से मन का मैल छूटता 
भ्रमित मानव के ह्रदय को कल्याण मार्ग सूझता .  

* शिव-पुराण की कथा विस्तार से बतलाइये 
पाप  के इस युग-कुटिल से हमको भी बचाइये
मन के दोष दूर हो ; संतोष का निवास हो 
अल्पायु मृत्यु भय हटे ,शिव में अटल विश्वास हो .
[जारी .....]
                                                               
शिखा कौशिक