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Monday, 2 April 2012

हे भोले ! तेरे हम भक्त हैं ![भक्ति....]

हे भोले ! तेरे हम भक्त हैं ![भक्ति....]
Shivling Amarnath


अल्हड़  हैं ..अलमस्त हैं ;
हे भोले ! तेरे हम भक्त हैं ;
पर भव-सागर में फंसे हुए हैं ;
माया बंधन से कसे हुए हैं ;
रक्षा करो हे नाथ बाबा अलख निरंजन !
बोलो  बम बम बम...बाबा अलखनिरंजन !









धर्म का लोप हुआ ...त्रस्त है दुनिया सारी;
घटा पुण्य का मान ...पाप का पलड़ा भारी ;
अपने डमरू की डम डम से हर लो अघ का तम ;
बाबा अलख निरंजन ! बोलो बम बम बम !


धोकर सभी के पाप हुई गंगा मैली ;
संस्कार की बिगड़ गयी सब भाषा शैली ;
हर लो संकट आकर अब  मेरे भगवन !
बाबा अलख निरंजन ! बोलो बम बम बम !




सारा जग द्वेष की आग में धू धू जलता 
तुम्ही  करो उद्धार जगत के कर्ता -धर्ता  ;
तुम तो हो उद्धारक और हम हैं अधमाधम ;
बाबा अलख निरंजन !बोलो बम बम बम 
                                                     जय गौरी शंकर की !
                                                      जय भोलेनाथ की !


                             शिखा कौशिक 

4 comments:

शालिनी कौशिक said...

dhanya ho gaye.धारा ४९८-क भा. द. विधान 'एक विश्लेषण '

शालिनी कौशिक said...

dhanya ho gaye.धारा ४९८-क भा. द. विधान 'एक विश्लेषण '

Kailash Sharma said...

बहुत सुन्दर भक्तिमय प्रस्तुति....

http://aadhyatmikyatra.blogspot.in/

Dr.NISHA MAHARANA said...

सारा जग द्वेष की आग में धू धू जलता
तुम्ही करो उद्धार जगत के कर्ता -धर्ता bahut accha....