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Wednesday, 12 June 2013

फहरती रहे सनातन धर्म पताका !









फहरती रहे फहरती रहे सनातन धर्म पताका !
करती रहे करती रहे कल्याण मानवता का !

भगवा रंग पताका लगती हम सबको मनभावन , 
भक्ति रस उर में भर देती निर्मल है अति पावन ,
मध्य में अंकित ॐ का  दर्शन सारे पाप मिटाता ! 
फहरती रहे फहरती रहे सनातन धर्म पताका !
करती रहे करती रहे कल्याण मानवता का !

सारी वसुधा एक कुटुंब है ये सन्देश फैलाती ,
सत्यमेव जयते की जोत हर ह्रदय में ये है जगाती ,
झुकाती रहे झुकाती रहे शीश हर रावण का !
फहरती रहे फहरती रहे सनातन धर्म पताका !
करती रहे करती रहे कल्याण मानवता का !

कण कण में भगवान बसे हैं सबको है बतलाती ,
प्रेम-अहिंसा करुणा का है नैतिक पाठ पद्धति ,
भर्ती रहे भरती रहे मानव में ये नैतिकता !
फहरती रहे फहरती रहे सनातन धर्म पताका !
करती रहे करती रहे कल्याण मानवता का !

शिखा कौशिक 'नूतन'


1 comment:

Shalini Kaushik said...


कण कण में भगवान बसे हैं सबको है बतलाती ,
प्रेम-अहिंसा करुणा का है नैतिक पाठ पद्धति ,
भर्ती रहे भरती रहे मानव में ये नैतिकता !
फहरती रहे फहरती रहे सनातन धर्म पताका !
करती रहे करती रहे कल्याण मानवता का !
bahut sundar aadhyatmik prastuti .aabhar