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Sunday, 17 July 2011

'' शिव महापुराण ''



श्री गणेशाय नम: 
''हे गजानन! गणपति ! मुझको यही वरदान दो 
हो सफल मेरा ये कर्म दिव्य मुझको ज्ञान दो 
हे कपिल ! गौरीसुत ! सर्वप्रथम तेरी वंदना 
विघ्नहर्ता विघ्नहर साकार करना कल्पना ''
                     
''''सन्दर्भ  ''''
                                             ॐ नम : शिवाय !
                                            श्री सीतारामचन्द्रभ्याम नम :



                            
श्रवण मास के आरम्भ के साथ ही ह्रदय ''बम-बम भोले '' के उद्घोष से गूंज   उठता है .हमारी संस्कृति की अमूल्य धरोहर १८ पुराणों में ''शिव महापुराण '' का विशेष महत्व है .मैंने भगवान गौरीशंकर की प्रेरणा से इसकी कथा को काव्य रूप में प्रस्तुत करने का एक प्रयास किया है .इसे पठन करने से यदि आपके ह्रदय में शिव भक्ति का एक क्षण के लिए भी उद्भव होता है और आप आनंद की अनुभूति करते हैं तब मैं अपने इस कार्य को सफल मानूंगी  .भगवान गौरी शंकर मेरी सहायता करें !


                              ''शिव महापुराण महिमा ''
*सकल ब्रह्माण्ड में है शिव -तत्व की ही सत्ता  
जीवन में सर्वत्र है शिव-शब्द की महत्ता 
एक शक्ति तीन रूप -सृजन-पालन-अंत
 शिवत्व-प्राप्ति ही मानव का ध्येय अनंत 


*शिव ही हैं कल्याणकारी;शिव ही सुन्दरतम ;
शिव ही सत्य रूप हैं ;शिव हैं प्रभु परम;
इस तत्व को जो जानते निर्मल उन्ही का मन 
शिव भक्ति रस में डूबते वे पुण्यशाली जन .

 * शौनक जी हैं पूछते कर विनम्र नमस्कार 
सूत जी बतलाइए पुराणों का कुछ तो सार

जिन पुराणों के श्रवण से मन का मैल छूटता 
भ्रमित मानव के ह्रदय को कल्याण मार्ग सूझता .  

* शिव-पुराण की कथा विस्तार से बतलाइये 
पाप  के इस युग-कुटिल से हमको भी बचाइये
मन के दोष दूर हो ; संतोष का निवास हो 
अल्पायु मृत्यु भय हटे ,शिव में अटल विश्वास हो .
[जारी .....]
                                                               
शिखा कौशिक 


2 comments:

शालिनी कौशिक said...

बहुत सराहनीय प्रयास प्रभु आपके इस प्रयास को सफल करें.बधाई

Sawai Singh Rajpurohit said...

ॐ नम : शिवाय !