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Monday, 18 July 2011

शिव-महापुराण [२]



''शिव-महापुराण  [२]''






* शिव पुराण तो स्वयं शिव का ही स्वरुप है ;
प्रत्येक शिव का भक्त शिव का ही दूजा रूप है ;
चित्त शुद्धि-प्रेम वृद्धि इसके श्रवण के लाभ हैं ;
शिव भक्त के चरण स्वयं तीर्थ राज प्रयाग हैं

 *इसके पठन पाठन  से मिलते दिव्य सब वरदान हैं  ;
इससे प्राप्त फल राजसूय यज्ञ के समान है ;
इसलिए हे सूत जी! हमको भी थोडा ज्ञान दो 
शिव भक्ति शीतल जल में करने हमें स्नान दो .

*सूत जी बोले मधुर वाणी में शौनक जी सुनो 
जो मुक्ति प्यास हो सदा शिव भक्ति रस ही पियो ;
शिव महा पुराण शिव-मुख से है प्रकट  हुई 
मुक्ति मार्ग खोलती अमृत-सदृश भक्तिमयी .

*सात संहिताएँ और चौबीस हज़ार शलोक हैं ;
प्रत्येक संहिता से मिलता नया आलोक है ;
शिव का भक्ति रस मन में सदा ही घोलती ;
हर संहिता शिव-तत्व के रहस्य खोलती .

*विद्येश्वर;रूद्र और शतरुद्र संहिता 
कोटि रूद्र,उमा और कैलाश नाम संहिता 
वायवीय जोड़कर सात हैं ये  संहिता सकल 
इनसे युक्त शिव महापुराण का है यश धवल .

*शिव महापुराण करती है मनोरथ सब सफल 
इसकी शीतल छाँव से त्रिताप का होता शमन 
ये बढाती बल पुरुष का ;संकटों की हो घडी 
आत्मा मुक्ति की सीढ़ी इसकी शक्ति से चढ़ी .

*फिर से शौनक जी ने की सूत जी से प्रार्थना 
आज आप कथा -पुष्पों से करे ये अर्चना ;
उन सभी पवित्र जन की जिनकी होती वंदना 
हे प्रभु !कहिये कथा खोलकर मन अर्गला .

*चित्त शुद्धि का यही सबसे सरल उपाय है ;
आदर्श पुरुषों की प्रेरक सभी कथाएं हैं ,
ये प्रभु के चरणों में आस्था बढ़ाएं हैं ;
इनसे हीन जन मूर्ख -निस्सहाय  है .

*सूत जी बोले -हे शौनक जी!  सत्य है तुमने कहा 
शिव पुराण पठन पाठन हरता हर संकट महा ;
मैं सुनाता हूँ तुम्हे -ये कथा प्राचीन है ;
किन्तु इसकी अर्थवत्ता आज भी नवीन है .
                                                               [जारी .....]

                                   शिखा कौशिक 



1 comment:

शालिनी कौशिक said...

बहुत सार्थक व् आध्यात्मिक प्रस्तुति दे रही हैं आप आभार